*मिलते जुलते रहा करो*
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धार वक़्त की बड़ी प्रबल है..
इसमें लय से बहा करो..
जीवन कितना क्षणभंगुर है..
मिलते जुलते रहा करो..
*यादों की भरपूर पोटली..*
*क्षणभर में न बिखर जाए..*
*दोस्तों की अनकही कहानी..*
*तुम भी थोड़ी कहा करो..*
हँसते चेहरों के पीछे भी..
दर्द भरा हो सकता है..
यही सोच मन में रखकर के..
हाथ दोस्त का गहा करो..
*सबके अपने-अपने दुःख हैं..*
*अपनी-अपनी पीड़ा है..*
*यारों के संग थोड़े से दुःख..*
*मिलजुल कर के सहा करो..*
किसका साथ कहाँ तक होगा..
कौन भला कह सकता है..
मिलने के कुछ नए बहाने..
रचते-बुनते रहा करो..
*मिलने जुलने से कुछ यादें..*
*फिर ताज़ा हो उठती हैं..*
*इसीलिए यारों नाहक भी..*
*मिलते जुलते रहा करो..*
*अपनों को समर्पित*
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धार वक़्त की बड़ी प्रबल है..
इसमें लय से बहा करो..
जीवन कितना क्षणभंगुर है..
मिलते जुलते रहा करो..
*यादों की भरपूर पोटली..*
*क्षणभर में न बिखर जाए..*
*दोस्तों की अनकही कहानी..*
*तुम भी थोड़ी कहा करो..*
हँसते चेहरों के पीछे भी..
दर्द भरा हो सकता है..
यही सोच मन में रखकर के..
हाथ दोस्त का गहा करो..
*सबके अपने-अपने दुःख हैं..*
*अपनी-अपनी पीड़ा है..*
*यारों के संग थोड़े से दुःख..*
*मिलजुल कर के सहा करो..*
किसका साथ कहाँ तक होगा..
कौन भला कह सकता है..
मिलने के कुछ नए बहाने..
रचते-बुनते रहा करो..
*मिलने जुलने से कुछ यादें..*
*फिर ताज़ा हो उठती हैं..*
*इसीलिए यारों नाहक भी..*
*मिलते जुलते रहा करो..*
*अपनों को समर्पित*