Thursday, May 20, 2021

गोपनीय दान का महत्व

 #आज एक सुन्दर जानकारी मिली ।


यूरोप का एक देश है नार्वे .... 

वहां कभी जाईयेगा तो 

यह सीन आम तौर पर पाईयेगा.... 


एक रेस्तरां है ...

उसके कैश काउंटर पर एक महिला आती है 

और कहती है - 

"5 Coffee, 1 Suspension"..

फिर वह पांच कॉफी के पैसे देती है 

और चार कप कॉफी ले जाती है ...


थोड़ी देर बाद ...

एक और आदमी आता है ,कहता है- 

"4 Lnch, 2 Suspension" !!! 

वह चार Lunch का भुगतान करता है 

और दो Lunch packets ले जाता है...


फिर एक और आता है ...

आर्डरदेता है -  

"10 Coffee,  6 Suspension" !!!

वह दस के लिए भुगतान करता है,

चार कॉफी ले जाता है...


थोड़ी देर बाद.... 

एक बूढ़ा आदमी जर्जर कपड़ों में  

काउंटर पर आकर पूछता है-  

"Any Suspended Coffee ??" 

काउंटर-गर्ल मौजूद कहती है- 

"Yes !!"

और एक कप गर्म कॉफी उसको दे देती है ...


कुछ देर बाद वैसे ही 

एक और दाढ़ी वाला आदमी अंदर आता है,

पूछता है- 

"Any Suspended Lunch ??" 

तो काउंटर पर मौजूद व्यक्ति 

गर्म खाने का एक पार्सल और 

पानी की एक बोतल उसको दे देता है ...


और यह क्रम ...

एक ग्रुप द्वारा अधिक पेमेंट करने का 

और 

दूसरे ग्रुप द्वारा बिना पेमेंट खान-पान ले जाने का 

दिन भर चलता रहता है .... 


यानि ...

अपनी "पहचान" न कराते हुए 

और 

किसी के चेहरे को "जाने बिना" भी 

अज्ञात गरीबों, जरुरतमन्दों की मदद करना...

यह है नार्वे नागरिकों की परंपरा !!!


और बताया गया कि 

यह "कल्चर" अब यूरोप के अन्य कई देशों में 

फैल रही है...


और हम ...???

अस्पतालों में एक केला,एक संतरा 

मरीजों को बांटेंगे...

सारे मिलकर अपनी पार्टी, अपने संगठन का 

ग्रुप फोटो खिंचाकर 

अखबार में छापेंगे !!!  

है ना ???


क्या भारत में भी ...

इस प्रकार की  खान-पान की 

"Suspension" जैसी प्रथा का 

प्रारंभ हो सकता है ???

◆-----------------------------------◆#आज एक सुन्दर जानकारी मिली ।


यूरोप का एक देश है नार्वे .... 

वहां कभी जाईयेगा तो 

यह सीन आम तौर पर पाईयेगा.... 


एक रेस्तरां है ...

उसके कैश काउंटर पर एक महिला आती है 

और कहती है - 

"5 Coffee, 1 Suspension"..

फिर वह पांच कॉफी के पैसे देती है 

और चार कप कॉफी ले जाती है ...


थोड़ी देर बाद ...

एक और आदमी आता है ,कहता है- 

"4 Lnch, 2 Suspension" !!! 

वह चार Lunch का भुगतान करता है 

और दो Lunch packets ले जाता है...


फिर एक और आता है ...

आर्डरदेता है -  

"10 Coffee, 6 Suspension" !!!

वह दस के लिए भुगतान करता है,

चार कॉफी ले जाता है...


थोड़ी देर बाद.... 

एक बूढ़ा आदमी जर्जर कपड़ों में  

काउंटर पर आकर पूछता है-  

"Any Suspended Coffee ??" 

काउंटर-गर्ल मौजूद कहती है- 

"Yes !!"

और एक कप गर्म कॉफी उसको दे देती है ...


कुछ देर बाद वैसे ही 

एक और दाढ़ी वाला आदमी अंदर आता है,

पूछता है- 

"Any Suspended Lunch ??" 

तो काउंटर पर मौजूद व्यक्ति 

गर्म खाने का एक पार्सल और 

पानी की एक बोतल उसको दे देता है ...


और यह क्रम ...

एक ग्रुप द्वारा अधिक पेमेंट करने का 

और 

दूसरे ग्रुप द्वारा बिना पेमेंट खान-पान ले जाने का 

दिन भर चलता रहता है .... 


यानि ...

अपनी "पहचान" न कराते हुए 

और 

किसी के चेहरे को "जाने बिना" भी 

अज्ञात गरीबों, जरुरतमन्दों की मदद करना...

यह है नार्वे नागरिकों की परंपरा !!!


और बताया गया कि 

यह "कल्चर" अब यूरोप के अन्य कई देशों में 

फैल रही है...


और हम ...???

अस्पतालों में एक केला,एक संतरा 

मरीजों को बांटेंगे...

सारे मिलकर अपनी पार्टी, अपने संगठन का 

ग्रुप फोटो खिंचाकर 

अखबार में छापेंगे !!!  

है ना ???


क्या भारत में भी ...

इस प्रकार की खान-पान की 

"Suspension" जैसी प्रथा

 का 

प्रारंभ हो सकता है ???

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Friday, May 14, 2021

उल्टी यात्रा:लेखक अज्ञात

 प्रेषक: रमा शंकर सिंह

लेखक:वरिष्ठ मित्र:अज्ञात

———————————

“ उल्टी यात्रा

बुढ़ापे से

बचपन की तरफ़

जो 50 को पार कर गये हैं या करीब हैं उनके लिए यह खास है🙏🏻🙏🏻🙏🏻

मेरा मानना है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है हमारे बाद की किसी पीढ़ी को "शायद ही " इतने बदलाव देख पाना संभव हो

🤔🤔🤔

# हम_वो आखिरी_पीढ़ी_हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखे हैं। बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और "वर्चुअल मीटिंग जैसी" असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को सम्भव होते हुए देखा है। 


🙏🏻 *हम वो पीढ़ी हैं* 🇳🇪

जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं हैं। ज़मीन पर बैठकर खाना खाया है। 

प्लेट में डाल डाल कर चाय पी है।


🙏 हम 🇳🇪 वो " लोग " हैं ?

जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल , खेले हैं ।


🙏हम आखरी पीढ़ी 🇳🇪 के वो लोग हैं ?

 जिन्होंने चांदनी रात में डीबरी, लालटेन या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और दिन के उजाले में चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।  


🙏हम वही 🇳🇪 पीढ़ी के लोग हैं ? 

जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।


🙏हम उसी 🇳🇪 आखरी पीढ़ी के लोग हैं ?

जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही  बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।


🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?

जो अक्सर अपने छोटे बालों में सरसों का ज्यादा तेल लगा कर स्कूल और शादियों में जाया करते थे।


🙏हम वो आखरी पीढ़ी 🇳🇪 के लोग हैं ?

जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी किताबें, कपडे और हाथ काले-नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती धोई है।


🙏हम वो आखरी 🇳🇪 लोग हैं ?

जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है।


🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?

जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर नुक्कड़ से भाग कर घर आ जाया करते थे। और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।


 🙏 हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं ?

जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया है!


 🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं 

जिन्होंने गुड़  की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं। 


🙏हम निश्चित ही वो 🇳🇪 लोग हैं

*जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे प्रोग्राम पूरी शिद्दत से सुने हैं।*


🙏हम वो 🇳🇪 आखरी लोग हैं 

*जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे।*

उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे।

*एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था।* 

*सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे।*

*वो सब दौर बीत गया। चादरें अब नहीं बिछा करतीं।* 

*डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं।*


🙏हम वो 🇳🇪 आखरी पीढ़ी के लोग हैं 

*जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं,* *जो लगातार कम होते चले गए।* 

*अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुदगर्ज़ी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन, व निराशा में खोते जा रहे हैं।* 

और 

🙏हम वो 🇳🇪 खुशनसीब लोग हैं 

जिन्होंने रिश्तों की मिठास महसूस की है...!!


🙏 *और हम इस दुनियाँ के वो लोग भी हैं जिन्होंने एक ऐसा "अविश्वसनीय सा"  लगने वाला  नजारा देखा है।*


*आज के इस करोना काल में परिवारिक रिश्तेदारों (बहुत से पति-पत्नी , बाप - बेटा ,भाई - बहन आदि ) को एक दूसरे को छूने से डरते हुए भी देखा है।*

 🙏 *पारिवारिक रिश्तेदारों की तो बात ही क्या करे खुद आदमी को अपने ही हाथ से अपनी ही नाक और मुंह को छूने से डरते हुए भी देखा है।*

 🙏


*" अर्थी " को बिना चार कंधों के श्मशान घाट पर जाते हुए भी देखा है।*

*"पार्थिव शरीर" को दूर से ही  "अग्नि दाग" लगाते हुए भी देखा है।*🙏


🙏हम आज के 🇳🇪 भारत की *एकमात्र वह पीढी हैं जिसने अपने " माँ-बाप "की बात भी मानी और " बच्चों " की भी मान रहे है।*  🙏


*शादी में (buffet) खाने में वो आनंद नहीं जो पंगत में आता था  जैसे....*


.

*सब्जी देने वाले को गाइड करना, 

*हिला के दे या तरी तरी देना!*

.

👉  *उँगलियों के इशारे से 2 लड्डू और गुलाब जामुन, काजू कतली लेना*

.

👉 *पूडी छाँट छाँट के और गरम गरम लेना !*

👉 *पीछे वाली पंगत में झांक के देखना क्या क्या आ गया, अपने इधर क्या बाकी है और जो बाकी है उसके लिए आवाज लगाना*

.

👉 पास वाले रिश्तेदार के पत्तल में जबरदस्ती पूडी

🍪 रखवाना !

.

👉 *रायते वाले को दूर से आता देखकर फटाफट रायते का दोना पीना ।*

.

👉 *पहले वाली पंगत कितनी देर में उठेगी उसके हिसाब से बैठने की पोजीशन बनाना।*

.

👉 और आखिर में पानी वाले को खोजना।

 😜 

..............

एक बात बोलूँ

इनकार मत करना

ये msg जितने मरजी लोगों को send करो

जो इस msg को पढेगा

उसको उसका बचपन जरुर याद आयेगा.

वो आपकी वजह से अपने बचपन में चला जाएगा , चाहे कुछ देर के लिए ही सही।

और ये आपकी तरफ से उसको सबसे अच्छा गिफ्ट होगा.

😊.

~~~~~~~~~~~~ 

*किसी पुराने दोस्त ने यह लेख मुझे भेजा है मैं इसे आपको भेज रहा हूँ .।


*सिलसिला चलता रहे* 

❤️❤️❤️❤️❤️

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Tuesday, May 4, 2021

ईश्वर दर्शन:वो सब देख रहा है

 *ईश्वर*


*एक दिन सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजी । 

दरवाजा खोला तो देखा एक आकर्षक कद- काठी का व्यक्ति चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान लिए खड़ा है ।*


*मैंने कहा, "जी कहिए.."*


*तो उसने कहा,*


*अच्छा जी, आप तो  रोज़ हमारी ही गुहार लगाते थे,*


*मैंने  कहा*


*"माफ कीजिये, भाई साहब ! मैंने पहचाना नहीं, आपको..."*


*तो वह कहने लगे,* 


*"भाई साहब, मैं वह हूँ, जिसने तुम्हें साहेब बनाया है... अरे ईश्वर हूँ.., ईश्वर.. तुम हमेशा कहते थे न कि नज़र मे बसे हो पर नज़र नही आते.. लो आ गया..! अब आज पूरे दिन तुम्हारे साथ ही रहूँगा।"*


*मैंने चिढ़ते हुए कहा,*


*"ये क्या मज़ाक है?"*


*"अरे मज़ाक नहीं है, सच है। सिर्फ़ तुम्हे ही नज़र आऊंगा। तुम्हारे सिवा कोई देख- सुन नही पायेगा, मुझे।"*


*कुछ कहता इसके पहले पीछे से माँ आ गयी.. "अकेला ख़ड़ा- खड़ा  क्या कर रहा है यहाँ, चाय तैयार है , चल आजा अंदर.."*


*अब उनकी बातों पे थोड़ा बहुत यकीन होने लगा था, और मन में थोड़ा सा डर भी था.. मैं जाकर सोफे पर बैठा ही था, तो बगल में वह आकर बैठ गए। चाय आते ही जैसे ही पहला घूँट पिया मैं गुस्से से चिल्लाया,*


*"अरे मां..ये हर रोज इतनी  चीनी ?"*


*इतना कहते ही ध्यान आया कि अगर ये सचमुच में ईश्वर है तो इन्हें कतई पसंद नही आयेगा कि कोई अपनी माँ पर गुस्सा करे। अपने मन को शांत किया और समझा भी  दिया कि 'भई, तुम नज़र में हो आज... ज़रा ध्यान से।'*


*बस फिर मैं जहाँ- जहाँ... वह मेरे पीछे- पीछे पूरे घर में... थोड़ी देर बाद नहाने के लिये जैसे ही मैं बाथरूम की तरफ चला, तो उन्होंने भी कदम बढ़ा दिए..*


*मैंने कहा,*


*"प्रभु, यहाँ तो बख्श दो..."*


*खैर, नहा कर, तैयार होकर मैं पूजा घर में गया, यकीनन पहली बार तन्मयता से प्रभु वंदन किया, क्योंकि आज अपनी ईमानदारी जो साबित करनी थी.. फिर आफिस के लिए निकला, अपनी कार में बैठा, तो देखा बगल में  महाशय पहले से ही बैठे हुए हैं। सफ़र शुरू हुआ तभी एक फ़ोन आया, और फ़ोन उठाने ही वाला था कि ध्यान आया, 'तुम नज़र मे हो।'*


*कार को साइड मे रोका, फ़ोन पर बात की और बात करते- करते कहने ही वाला था कि 'इस काम के ऊपर के पैसे लगेंगे' ...पर ये  तो गलत था, : पाप था तो प्रभु के सामने कैसे कहता तो एकाएक ही मुँह से निकल गया,"आप आ जाइये । आपका काम हो  जाएगा, आज।"*


*फिर उस दिन आफिस मे ना स्टाफ पर गुस्सा किया, ना किसी कर्मचारी से बहस की 25 - 50 गालियाँ तो रोज़ अनावश्यक निकल ही जाती थी मुँह से, पर उस दिन  सारी गालियाँ, 'कोई बात नही, इट्स ओके...'मे तब्दील हो गयीं।*


   *वह पहला दिन था जब क्रोध, घमंड, किसी की बुराई, लालच, अपशब्द , बेईमानी, झूठ ये सब मेरी दिनचर्या का हिस्सा नही बनें*।


*शाम को आफिस से निकला, कार में बैठा, तो बगल में बैठे ईश्वर को बोल ही दिया...*


*"प्रभु सीट बेल्ट लगा लें, कुछ नियम तो आप भी निभायें... उनके चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान थी..."*


*घर पर रात्रि भोजन जब परोसा गया तब शायद पहली बार मेरे मुख से निकला,*


*"प्रभु, पहले आप लीजिये ।"*


*और उन्होंने भी मुस्कुराते हुए निवाला मुँह मे रखा। भोजन के बाद माँ बोली,* 


*"पहली बार खाने में कोई कमी नही निकाली आज तूने। क्या बात है ? सूरज पश्चिम से निकला है क्या, आज?"*


*मैंने कहाँ,*


*"माँ आज सूर्योदय मन में हुआ है... रोज़ मैं महज खाना खाता था, आज प्रसाद ग्रहण किया है माँ, और प्रसाद मे कोई कमी नही होती।"*


*थोड़ी देर टहलने के बाद अपने कमरे मे गया, शांत मन और शांत दिमाग  के साथ तकिये पर अपना सिर रखा तो ईश्वर ने प्यार से सिर पर हाथ फिराया और कहा,*


*"आज तुम्हे नींद के लिए किसी संगीत, किसी दवा और किसी किताब के सहारे की ज़रुरत नहीं है।"*


*गहरी नींद गालों पे थपकी से उठी...*


*"कब तक सोयेगा .., जाग जा अब।"*


*माँ की आवाज़ थी... सपना था शायद... हाँ, सपना ही था पर नीँद से जगा गया... अब समझ में आ गया उसका इशारा...*


 *"तुम नज़र में हो...।"*


*जिस दिन ये समझ गए कि "वो" देख रहा है, सब कुछ ठीक हो जाएगा। सपने में आया एक विचार भी आंखे खोल सकता है।*


    *स्नेह वंदन*

       *प्रणाम*