Wednesday, September 25, 2019

मोटिवेशन ----आप जिसके हकदार है क्या वो आपको मिला??


*आपने अपने जीवन में  बहुत मेहनत व् बहुत संघर्ष किया
 लेकिन क्या आपको वो सब मिला जिसके आप हकदार थे ?
*क्या आप भी वह अपनी मंज़िल तक पहुंचते पहुंचते रह गए??
*क्या आप हकदार नहीं वो सब पाने के,जो आपको बहुत पहले मिल जाना चाहिए था?
*इसी कारण क्या  आप भी पीड़ित है फ्रस्टेशन,डिप्रेशन,स्ट्रेस,क्रोध एवं अशांत पारिवारिक जीवन?
*क्या आपके पास मॉडर्न टेक्नोलॉजी,आधुनिक शिक्षा की कमी  है?
दुनियाँ की रेस में अपने को हारा,पिछड़ा  हुआ महसूस करते है?
*दुनियाँ भर की असफलताओं के कारण आप भी हीन भावनाओ से ग्रसित है?
*क्या आप भी अपने क़रीबो से धोखा खाये बैठे है?
*क्या आप भी ये मान बैठे है कि "अब हम से न हो पायेगा"
*क्या आप भी वर्तमान हालत के कारण पिछड़ गये है,अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे है ?
*क्या आप भी अपनी असफलता के कारण अपने भाग्य को दोषी मानते हैं? भगवान की यही मर्ज़ी?
*क्या आप भी  रास्ता भटक गए है करे तो करे क्या,जाए तो जाए कहाँ?
*दिलकी बात आखिर कहें तो किस से कोई सुनने वाला समझने वाला है ही नहीं?
*क्या आप अपने को बिल्कुल अकेल महसूस करते हो?
*कोई अपना नहीं?क्या आप भी किसी पैर विश्वास नहीं करते?
*दिन रात चिंता फिक्र डिप्रेशन नींद न आना,नशे की आदत,गिरता स्वास्थ्य,भविष्य की चिंता मेरा क्या होगा?
*अनिर्णय,क्या करे,कहाँ से शुरू करे,कैसे करे?मेरे पास तो ये नहीं है मेरे पास तो वो नही है मैं कैसे कर पाऊंगा?
*मुझे मौका कब मिलेगा?
*मेरा चांस कब?
***आइए हम आपको बताएंगे आप के पास क्या है,
आप मे भी वो क्षमता है, आप भी उस सब को पाने के हकदार है, आपके पास जो है वो औरों के पास नही है
***हम आपके हर दुख दर्द से निकालेंगे ,आपकी आंतरिक शक्तियों को जागृत करना सिखाएंगे ?
**हम आपकी हर बात सुनेंगे और विश्वास मानिए किसी को नहीं बताएंगे भी नहीं ,
***हम विकसित करेंगे आपके अंदर आपकी आंतरिक शक्ति,क्षमता,
***अब आपका नंबर है
***Now this is your chance,
***ये सब कुछ बहुत आसानी से उपलब्ध है?
***प्रकृति,यूनिवर्स,में सब कुछ मौजूद है बस आपको उसे पाना सीखना है,
***मेन्टल ब्लॉक खोलिए,
***ये जो सब मान बैठे है ऐसा कुछ नहीं है
***आपका हक है खुश रहने के!!!
***आप डिज़र्व करते है आपको मिलना चाहिए,
***तमाम लोग जो सफल हुए वो क्या आपसे ज्यादा योग्य थे?
***क्या सफल होने के लिए कोई डिग्री आवश्यक है?
***यदि हाँ तो सारे पड़े लिखे लोग क्यो अनपढ़ लोगो के यहां नौकरी कर रहे है??
***जिनको अयोग्य मानते हैं वो सफल क्यो हो गए??
***सफलता के लिए न तो योग्यता न ही कोई स्किल की जरूरत होती!!***दुनियाँ में लोगो के पास इतनी धन दौलत ऐश्वर्य मान संम्मान क्या ये सब सिर्फ  डिग्री य मेहनत से ही कमाया जा सकता है??
यूनिवर्स/प्रकृति/भगवान के यहां सफलता धन दौलत ऐश्वर्य बांटने का को मापदंड नहीं है!!
***यूनिवर्स बस एक शक्ति है जो सबके लिए उपलब्ध है,बस आपको लेना सीखना है जिसे हम सिखाएंगे
जैसे सूर्य की रोशनी सबके लिए बराबर है चाहे गरीब अमीर,ईमानदार बेईमान,चोर साहूकार
ज्ञानी अज्ञानी
***अगर हम अपने दरवाजे खिड़कियां बंद करके रखेगे तो सूर्य की रोशनी कैसे प्रवेश करेगी??
***हम कहते है अंधेरा है कैसे दूर करे?
***दरवाज़े,खिड़कियां तो  हमने ही बंद कर रखे है अपने उधर के ज्ञान/अज्ञान से??
**बस बाहर निकलिये,अपने उधर के ज्ञान से ,मुक्त कीजिये मानसिक बंधनो से?
***जो आप जानते है,मानते है विश्वास करते है वो सही ही हो इसकी क्या गारण्टी इसको सच मानने का अधिकार आपको किसने दे दिया ?विश्वास कीजिये भीड़ का कोई भविष्य नहीं होता ,अपना रास्ता स्वयं चुनिए ,अपने अनुभवों से सीखिए ,
***अपने को खाली कीजिये तुरंत ,नै रौशनी को आने दे,आज अभी तुरंत इसी समय!!!
 ***आपका भाग्य खुल गया है
****अब आपका नम्बर है ..........!!!






स्वास्थ्य ----ह्रदय रोग का सहज इलाज

*हृदय की बीमारी*
*आयुर्वेदिक इलाज !!
हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे
उनका नाम था *महाऋषि वागवट जी !!*
उन्होने एक पुस्तक लिखी थी
जिसका नाम है *अष्टांग हृदयम!!*
*(Astang  hrudayam)*और इस पुस्तक मे उन्होने ने
 बीमारियो को ठीक करने के लिए *7000* सूत्र लिखे थे !
यह उनमे से ही एक सूत्र है !!
वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है !
मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है !
तो इसका मतलब है कि रकत (blood) में acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है !
अम्लता आप समझते है !
जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!
*अम्लता दो तरह की होती है !*
एक होती है *पेट कि अम्लता !*
*और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!*
आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !
तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !!
खट्टी खट्टी डकार आ रही है !
मुंह से पानी निकाल रहा है !
और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये !
तो hyperacidity होगी !
और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती !!
और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त  (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता !
और नलिया मे blockage कर देता है !
तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !!
और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं !
क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!
इलाज क्या है ??
वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है !
तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !
आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !
*अम्लीय और क्षारीय !!*
*acidic and alkaline*
अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????
*acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????*
*neutral*
होता है सब जानते है !!
तो वागबट जी लिखते है !
*कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !*
तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!!
और रक्त मे अम्लता neutral हो गई !
तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !!
ये है सारी कहानी !!
अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????
आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है !
जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए !
और अगर आ गया है !
तो दुबारा न आए !!
सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!
जिसे दुधी भी कहते है !!
 English मे इसे कहते है bottle gourd !!!
जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !
इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है !
तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !!
या कच्ची लौकी खायो !!
वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे  ज्यादा ताकत लौकी मे ही है !
तो आप लौकी के रस का सेवन करे !!
कितना सेवन करे ?????????
रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!
कब पिये ??
सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!
या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!
 इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !
इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो
*तुलसी बहुत क्षारीय है !!*
इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है !
*पुदीना बहुत क्षारीय है !*
इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !
ये भी बहुत क्षारीय है !!
लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !
वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !!
ये आयोडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!
तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !!
2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !!
21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!
कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !!
घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !!
और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!
और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे !
डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !!
हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!
आपने पूरी पोस्ट पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!
###*- यदि आपको लगता है कि मेने ठीक कहा है तो आप ये जानकारी सभी तक पहुचाए
 *ॐ नमो भगवते वासुदेवाय* 💹
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मोरल स्टोरी ----मंत्रो से प्राण दाल दिये----

एक बार की बात है 
एक गांव में *मंदिर*
का काम चल रहा था,
मंदिर *आदिवासी* और
*गरीब* लोग बना रहे थे,
एक *आदिवासी बड़ी मूर्ति*
बना रहा था!
कुछ दिन बाद *मंदिर* बनकर
तैयार हो गया,
मंदिर में *पुजारियो* द्वारा
*हवन कार्य मूर्ति स्थापना*
और *मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा*
आदि कार्य सम्पन्न हो गया,
अगले दिन *मन्दिर दर्शन* के
लिए खोल दिया।
वह *मूर्तिकार* जिसने मूर्ति
बनाई वो भी *दर्शन* को
आया था ।
वह ख़ुसी के मारे बिना *चप्पल*
उतारे *मन्दिर में प्रवेश*
कर गया ।
पुजारी उस पर *क्रोधित* हुआ
और कहा -
'मू र्ख तू जाहिल है क्या
*चप्पल* पहनकर मन्दिर
में नही आते
जा चप्पल *बहार* उतार के
आ '!
आदिवासी बोला -' *पुजारी जी*
जब में चप्पल पहनकर मूर्ति
बना रहा था
और चप्पलों से उस पर चढ़
जाता था तब किसी ने मना
नही किया :'!
पुजारी बोला -" बेबकूफ हम
ने अपने मन्त्रो से
*मूर्ति में प्राण* डाल दिए है
समझ गया ",
बेचारा *आदिवासी चुपचाप*
अपने घर चला गया,
कुछ दिन बाद वह दोवारा
मन्दिर गया तो देखा की मन्दिर
में ताला लगा था,
उसको किसी ने बताया
की *पुजारी जी* का *बेटा*
खत्म हो गया है।
यह सुनकर वह *दौड़* कर
*पुजारी के घर* गया ।
वहा देखा सब लोग रो
रहे थे । वह धीरे से पुजारी
के पास जाकर बोला
की आप रो क्यों रहे है,
जैसे अपने मूर्ति में अपने
*मन्त्रो से प्राण डाल दिए*
वेसे ही अपने बेटे में
प्राण डाल दीजिए,
यह सुनकर सब अचंभे से
उसकी तरफ देखने लगे ।
*पुजारी बोला* -'क्या ऐसा
कभी होता है कोई मरा हुआ
दुबारा जीवित होता है
*आदिवासी बोला*-' तो आपने
मन्दिर में जो बात बोली
क्या वो झूठ थी
और *इस प्रश्न का उत्तर*
आज तक नही मिला है?
*अंधविश्वास भगाओ*
*देश बचाओ*

मोरल स्टोरी ---प्रकृति का नियम

प्रकृति  का पहला  नियम:-
यदि खेत में बीज न डालें जाएं
तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती हैं ।
ठीक उसी तरह से  दिमाग में सकारात्मक विचार न भरे जाएँ
तो नकारात्मक विचार दिमाग़ में अपनी जगह बना ही लेती है ।

 प्रकृति का दूसरा नियम:-
जिसके पास जो होता है वह वही बांटता  है।
सुखी "सुख  "बांटता है
दुःखी  "दुःख " बांटता  है
ज्ञानी "ज्ञान" बांटता है
भ्रमित  "भ्रम "बांटता है
भयभीत" भय "बांटता हैं

प्रकृति का तीसरा नियम:-
आपको  जीवन से जो कुछ भी मिलें  उसे पचाना सीखिये---- क्योंकि
भोजन  न पचने  पर रोग बढते है।
पैसा न पचने  पर दिखावा बढता है
बात  न पचने पर चुगली  बढती है ।
प्रशंसा  न पचने पर  अंहकार  बढता है।
निंदा  न पचने पर  दुश्मनी  बढती है ।
राज न पचने पर  खतरा  बढता है ।
दुःख  न पचने पर  निराशा बढती है ।
और सुख न पचने पर  पाप बढता है ।
बात  कडुवी बहुत  है
:पर सत्य  है:

रिदमिक ब्रीथिंग:क्रोध को कैसे काबू करे शांत कैसे रहे सूत्र --3

*स्वास:प्राण:प्राणायाम*सूत्र -5

*!!प्राणवायु का रूपांतरण!!*ट्रांसफॉर्मेशन  ऑफ़ ब्रीथिंग*
प्राणायाम ही एक सूत्र है ,कहते  जापानी लोग सबसे काम क्रोध करते हैं उन्होंने क्रोध से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा  रूपांतरण खुश रहने में, मुस्कुराने में  कर लिया है, इन्होने  शिक्षा को सही मायनो में अपनाया है , कमसे काम एक मानवीय बुराई पर काबू पाने का प्रयास तो किया ,जापान में बच्चो को शुरू  से शिक्षा दी जाती है की जब भी क्रोध आये उस समय गहरी साँस लो ,धीरे धीरे साँस लो, गहरी  साँस   धीरे धीरे लो, "डीप एंड स्लो"
क्रोध एक ऐसी मानवीय प्रक्रिया है जिसे ज्ञान के माध्यम रोका नहीं जा सकता हाँ बस क्रोध आने की सीमा को ऊपर उठाया जा सकता है रोका कदापि नहीं जा सकता,क्योकि यह अपने हाथ की बात भी नहीं है, हाँ कंट्रोल करने का प्रयास अवश्य किया जा सकता है ,क्रोध को काबू करने की शिक्षा चलती रहती परन्तु अंतर शायद ही कुछ पड़ता हो,

क्रोध इतना हाथ में नहीं है, जितना लोग समझते हैं कि क्रोध मत करो। क्रोध इतना वालंटरी नहीं है, नान वालंटरी है। इतना स्वेच्छा में नहीं है, जितना लोग समझते हैं। इसलिए शिक्षा चलती रहती है; कुछ अंतर नहीं पड़ता है.भगवन बुद्ध और श्री कृष्ण ने "प्राण योग"पर बहुत ज़ोर दिया था ,
हम भी यहाँ आती जाती स्वास को ही एक लय  में लेन का प्रयास ही सीखा रहे है, इस आती जाती स्वास का गहरा राज जिसने समझ लिया उसको दुनियां में कुछ समझने को शेष नहीं रह जायेगा। जिसका स्वास सध गया उसके काबू में भूत  और भविष्य आसानी से आ जाता है, मौत का भय समाप्त हो जाता है, जिसको मौत का भय न हो उसे दुनियां  में कोई दूसरी चीज़ भयभीत कर ही नहीं सकती ,'स्वास साढ़े सब सधे "

ध्यान देने वाली बात यह हैं जिसे हम सब ने महसूस किया होगा  क्रोध के समय हमारे स्वास की गति बदल जाती है स्वास की गति बदलते ही हृदय की गति भी बदल जाती है, धड़कन तेज़ हो जाती है, इसके कारण शरीर का प्रत्येक अंग कुछ अलग तरह से व्यव्हार करने लगता है चेहरा लाल हो जाता है रक्त चाप बढ़ जाता है,पसीना आने लगता है, शरीर में विशेष प्रकार का कम्पन्न शुरू हो जाता है,स्वास अस्त-व्यस्त हो जाती है,इसके विपरीत जब हम  शांत एवं प्रसन्न  चित्त  होते है उस समय स्वास की गति पता ही नहीं चलती,स्वास चल भी रही है या नहीं,

पर यह तय है कि हमारे अंदर की मन स्तिथि स्वास से ही जुडी हुई हैं इसका  मतलब स्पस्ट है स्वांस की गति को बदल ते ही मन स्तिथि को बदला जा सकता है, भीतर व् बहार की स्तिथि को नियंत्रण में लेन के लिए स्वास को नियंत्रण में लाना ज्यादा आवश्यक  है,  ,
हमारे विद्वानों ने हज़ारो  ध्यान विधियों का प्रसार प्रचार खूब किया, लोगो ने माना  भी है,फॉलो भी किया बस बहुत कम ही सफल हो पाए, जबकि सारी की सारी  अन्तर  यात्रा, समाधी, ध्यान सब की नीव स्वास पर ही टिकी है,अगर हमने स्वास नियंत्रण य सॉस को लयबद्ध  करना सीख लिया या इस स्वांस प्रक्रिया  का स्वाद चख लिया तो फिर ध्यान व् समाधी में उतरना बिलकुल आसान होता जायेगा, यही डोर हैं अंतर यात्रा की,हमारे शरीर मन बुद्धि आत्मा परमात्मा को एक सूत्र में पिरोने वाली क्रिया ही जानने योग्य है. वो स्वास,प्राण वायु ,स्वास एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन के आरम्भ से शुरू होती है और अंत तक रहती है,स्वास रुकी तो सारे नाते  सम्बन्ध उसी समय टूट जाते है,
अर्थात स्वास को साधे,
स्वास का रूपांतरण ही प्राणायाम,प्राण योग,ध्यान,समाधि सिद्धि है ,
आइये शुरू करते है
स्वास अंदर भरिये ,गहरी भरिये ,धीरे धीरे भरिये  १,२,३,४,५
रोकिये अंदर १,२,३
बाहार छोड़िये १,२,३,४,५,६,७,८
बाहर रोकिये १,२,3
बस इस छोटी सी प्रक्रिया को १० से लेकर २०  मिनिट  रोजाना निश्चित स्थान व् निश्चित समय पर कीजिये इस क्रम को २१   दिन तक न टूटने दे,फिर देखिये क्या क्या परिवर्तन आप स्वयं महसूस करते है उसे यहाँ बताना आवश्यक नहीं, यह वो स्वाद है जिसे शब्दों के द्वारा नहीं समझाया जा सकता ,इसका स्वाद जो चखेगा वो ही जान पायेगा ,जैसे "पानी" का स्वाद शब्दों में कैसे समझायेंगे बताइये .............
आज के लिए इतना ही.बस आपको करना है निरंतर प्रयास।
अगली चर्च सूत्र 6 में करेंगे