Thursday, November 26, 2020

सहज ध्यान

 क्या 24 घंटो में कुछ क्षणों के लिये अपनी वर्तमान परिस्तिथियों से मुक्त नही हुआ जा सकता..?

नींद एक सहज ध्यान प्रक्रिया का एक रूप है?क्या सोते वक्त हम महसूस करते है कि हम कौन है?गरीब है अमीर है,दुःखी है सुखी है,स्त्री है पुरुष है बालक है वृद्ध है?कहां सो रहे है कहाँ नहीं हमारा बिस्तर नरम है सख्त है...इत्यादि इत्यादि इत्यादि...यानि हम अपनी वर्तमान परिस्तिथियों से कुछ वक्त के लिये मुक्त हो जाते है इसी लिए सुबह खुश,प्रफुल्लित नए उत्साह-शक्ति-जोश से भरपूर उठते है मन पूर्णतः शांत होता है..कभी विचार किया ऐसा क्यों होता है?? 

प्रश्न यह है कि क्या जानते बुझते हम कुछ समय के लिए अपनी वर्तमान परिस्तिथि से बाहर नही आ सकते?

जो व्यक्ति थोड़े समय के लिए भी अपनी वर्तमान परिस्तिथि से सचेत रूप से बाहर आना शुरू कर देता है तब कुछ समय मे उसे यह महसूस होने लगता है कि वो हमेशा परिस्तिथियों से बाहर ही है।

सुबह होती है शाम होती है रात होती है,सर्दी गर्मी बरसात,स्वाथ्य-अस्वस्थ्य,सुख-दुख की परिस्तिथियां आती है और गुज़र जाती हैं परंतु मनुष्य मानव य हम स्वयं वही के वही खड़े मिलते है यानि परिस्तिथियां बदलती रही और हम वही सहज रुप से साक्षी भाव,दर्शक के रुप में वही के वही खड़े रहे.मतलब जो समय गुज़र गया,जो परिस्तिथि गुज़र गई और हम पृथक दूर खड़े रह गए वहीं,

यानि हमे प्रयास करना है कि हमे परिस्तिथियों के बाहर रहने का अभ्यास करना है.."सहज ध्यान"का अर्थ यही है वर्तमान परिस्तिथियों से बाहर रहना यह अनुभव सहज ध्यान से उपलब्ध होता है,

कभी हम जिन परिस्तिथियों से घिरे थे आज उन सब से मुक्त है,परिस्तिथियां हमेशा बदलती रहती है और हमे हमेशा वर्तमान परिस्तिथियों के बाहर ही रहने के प्रयास का अभ्यास करना है..जिसे सहज ध्यान व आंनद का मार्ग भी कह सकते है मर्ज़ी आपकी है...वर्तमान परिस्तिथियों यानि के आज हमारे पास जो है उसके प्रति धन्यवाद gratitude या जो नही है उसके प्रति शिकायत complaints का भाव रखे वास्तव में दो स्तिथि एक ही है अब हमारी चॉइस है हमे प्रसन्न रहना है या हमे दुखी रहना है,हमे आदत डालनी ही होगी दोनों से बाहर रहने की...वर्तमान परिस्तिथियों से बाहर रहने की ओर यही है सहज ध्यान में उतारने का एक सहज मार्ग,

यह उपलब्धि हमकों सहज प्रसन्नता की और दिन प्रति दिन अग्रसर करेगी और हमारे व्यक्तित्व में शांति-सुख-हैप्पीनेस की अनुभूति होगी।

स्वतः आवश्यकता की वस्तुएं उपलब्ध होने लगेंगी और हम स्वतःहैप्पी रहने लगेंगे।

क्रमशः....



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