Sunday, August 25, 2019

रिदमिक ब्रीथिंग:डीप ब्रीथिंग के फायदे सूत्र 4

स्वास:प्राण:प्राणायाम:ध्यान:सूत्र-२

पिछले अंक से आगे:क्या इस चक्रव्यूह से निकल पाएंगे...
अब विचार करिये आखिर यह शरीर रोज के कार्यकलाप कैसे सम्पन्न करता है आखिर ये अविरल ऊर्जा मिलती कहाँ से है और कैसे  ??
बिजली के उपकरण बिजली से चलते है,
कुछ उपकरण वाष्प शक्ति से चलते है,
यह शरीर रूपी इंजन(मशीन)चलती है "प्राण"वायु शक्ति से..जिसके ऊपर हमारा ध्यान कभी जाता है नहीं हम तो यह माने बैठे है यह तो हमे निरन्त अविरल उपलब्ध रहेगी ही हमलोग इसके लिए"लीस्ट-बोदर्ड" रहते है!!!
जबकि सांस लेने में ज़रा सी भी कठिनाई हो जाये तो एक पल जीना दूभर हो जाता है, है न,
सीधे आई सी यू मे जाना पड़ता है,
कुछ क्षणों में जीवन मृत्यु की जंग शुरू हो जाती है और इस प्रकार का व्यक्ति एक-एक सांस के लिए दुआएं मांगता है उस समय पता चलता है इस "प्राण-वायु" की कीमत,एक एक प्राण सांस के लिए व्यक्ति अपनर जीवन की पूरी दौलत निछावर करने को तैयार रहता है,
एक तरफ हम है कि इसकी कीमत समझने को तैयार ही नहीं है?
आइए अब मूल मुद्दे पर आते है:आखिर ये प्राण वायु है क्या और इसको कैसे संजो कर रखे:
ये एक एक स्वांस जीवन और मृत्यु के बीच की स्वर्ण डोर है,जो स्वांस एक बार बाहर गई तो कोई गारंटी नहीं है कि ये दुबारा अंदर आयेगी ही!!
और अगर नहीं आएगी तो यह शरीर उसी क्षण मृत हो जाएगा,दुनियां दारी के संबंध उसी क्षण विच्छेद हो जाएंगे,उस मृत शरीर को छूने मात्र से जीवित व्यक्ति को भय महसूस होगा और अगर छू भी लिया तो स्वयम की शुद्धि के लिए तुरन्त स्नान आदि करना पड़ेगा यह सच है न..
ये जो "प्राण"स्वांस प्राण वायु जो भी कहे जब इतनी इम्पोर्टेन्ट है फिर हम सब इसके प्रति इतने ल परवाह क्यो है??क्या हम इन "प्राण-वायु"का भोजन व पानी के अनुपात मे उचित संम्मान,प्राथमिकता देते है??कदापि नहीं क्योंकि यह तो हमे बिना प्रयास के उपलब्ध है इस लिए हमारे जीवन मे इसकी कोई कर्मठ इज्जत है ही नहीं?

आईये और बताइये कभी अपने छोटे बालक को सोते हुए देखा है?वो कैसे सांस लेता है,
उसका पेट कितना ऊपर नीचे होता है!!
क्या इतना परिवर्तन आपके हमारे शरीर मे होता है??
कभी देखा नोट किया एक छोटा बच्चा कितना भोजन करता है और पूरे दिन कितना श्रम करता है,1से4-5 वर्ष के बच्चे पूरे दिन में 10-10किलो मीटर तक चल-दौड़ लेते है..चेहरा गुलाब के फूल की तरह सुंदर और तेजमय होता है,आखिर इतनी ऊर्जा कहाँ से आती है?
क्या हम इतने सूक्ष्म आहार के साथ बिना थके इतना
श्रम कर सकते है??शायद नहीं आखिर यह कौनसी शक्ति ऊर्जा बच्चो के पास है और हमारे पास नहीं है,
जैसे जैसे हम बड़े होते है,खुशी,प्यार,मोहब्बत,बेफिक्री दूर होती जाती है और चिंता,फिक्र,शोक,दुःख इत्यादि इत्यादि हमे घेरते जाते है और नतीजा धीरे धीरे स्वास्थ गिरता जाता है बीमारियां दिन पर दिन घेरती जाती है?आखिर क्यों?
यह अकाट्य सत्य "जीवन-मरण"उस परम शक्ति परम् सत्ता के हाथ मे है जिसे हम विभिन्न नामो से अपने धर्म और मज़हब के अनुसार पुकारते है,
लेकिन जब तक इस ग्रह पर वास करे तब तक प्रसन्न चित्त खुश व स्वस्थ व संतुष्ट रहना तो हमारे ही हाथ मे है..!
आज बस इतना ही अगले अंक में चर्चा करेंगे ...सूत्र..3में

Saturday, August 24, 2019

रिदमिक ब्रीथिंग सूत्र --1

स्वास:प्राण:प्राणायाम:ध्यान:सूत्र-1
हमलोग भोजन के बिना कई दिन तक जीवित रह सकते है,पानी के बिना कुछ दिन जीवित रह सकते है,
परंतु स्वास के बिना कुछ पल व कुछ मिनिट भी जीवित रहना ना मुमकिन है,
हम लोग सबसे ज्यादा ध्यान भोजन पर देते है हज़ारों ग्रंथ लिखे जा चुके है क्या खाएं क्या न खाए,कितना खाये,किस समय खाये,किस भोज्य पदार्थ के गुण अवगुण की इतनी समीक्ष हुई है कि आज हम अनिर्णय की स्तिथि में पहुंच गए किसकी बात माने किसकी बात न माने, आखिर क्या खाएं क्या न खाए?
हमारी इस छोटी सी बात ने आज डायटिशियन व स्वास्थ्य वर्धक भोजन का सबसे बड़ा व्यापार दुनियां भर में विकसित हो गया,और आज भी इस व्यापार की दिन दूनी रात चौगनी वृद्धि हो रही है,
इसी प्रकार स्वच्छ पेयजल का व्यापार भी खूब फल फूल रहा है,विभिन्न प्रकार के फ़िल्टर,एल्कलाइन वाटर,मिनरल वाटर इत्यादि इत्यादि हम भी इस अंधी दौड़ में दौड़ते चले जा रहे है.....जा कहाँ रहे है ये किसी को नहीं मालूम...मार्केटिंग व विज्ञापन का दौर है आज किसी ने मार्केटिंग में डॉक्टर,विशेषज्ञ व व्यपारियो की एक गैंग बन गई है जो दिशा निर्धारित करती है क्या खिलाया जाए और क्या न खिलाया जाए ये एक बहुत बड़ा गोरखधंधा है और हम आम लोग इसमें इतने उलझ गए है,जहां ज्यादा सुना ज्यादा देखा उसी और दौड़ पड़े....दौड़ते दौड़ते जेब भी खाली होने लगी...परंतु नतीजा वही का वही??
जवाब सोचिए:
*क्या आप अब ज्यादा स्वस्थ है?
*क्या आप पहले से ज्यादा उत्साहित है?
*तनाव कम हुआ?
*परिवारिक संबंध सुधरे?
*संतुष्टि मिली?
*इत्यादि इत्यादि..
*इतना ज्यादा भोजन व पानी पर ध्यान दे कर भी बीमारियां बडी है हरेक परिवार का एक निश्चित अंश अस्पतालों,डॉक्टरों व दवाइयों पर खर्च बढ़ता ही जा रहा है,
महानगरों में सिर्फ दो ही व्यापार फलफूल रहे है
*होटल रेस्टॉरेंट,ढाबे,वाटर फिल्टर्स,स्वास्थ्य वर्धक भोजन,ऑर्गेनिक फ़ूड,हेल्थी फ़ूड,सुपर फ़ूड....!
*दूसरे फाइव स्टार मल्टी इस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स,दवा कम्पनीयां...
*वर्तमान खान पान बीमारियों को कम कर ही नही सकता...इसीलिए नए नए अस्पताल रोज खुल रहे है!!
*इनमें हम लोगो को पहुंचाने के लिए एक ए एक बढ़िया रेटोरेंट..क्या कभी निकल पाएंगे हम इस चक्र व्यू से...शायद नहीं...