तनाव, चिंता, फिक्र आज कल ज़िंदगी का हिस्सा बन गई है,
हर दूसरा व्यक्ति इन परेशानियों से त्रस्त है:
आफिस हो घर हो य अन्य कोई स्थान हो तनाव पीछा छोड़ते ही नहीं,
चिंता,फिक्र,तनाव के कारण मन मे शांति नही रहती और जब मन अशांत रहता है
तब उसका मुकाबला करते करते अक्सर व्यक्ति तनाव व डिप्रेशन में आ जाता है,
ज़िंदगी में हरेक की ज़िंदगी में ऐसे मुकाम आ जाते है जहाँ अच्छे से अच्छे ,स्ट्रांग विल पॉवर वाले व्यक्ति भी सब कुछ जानते समझते हुए भी डिप्रेशन,एंगजाइटी,मानसिक तनाव इत्यादि के शिकार हो ही जाते हैं और इनका इलाज़ न तो योग न हीं दवाइयाँ,और ना ही ध्यान से कुछ फर्क पड़ पता ,
ब्रेन दिमाग शान्त ही नहीं होता, विचार रुकते ही नहीं ध्यान क्या और कैसे लगेगा , अनेको विधियां अपनाने के बाद भी मानसिक शांति कुछ पलो के लिए भी मिलना मुश्किल हो जाती है
ऐसे में मात्र कुछ पल डिसकनेक्ट होने के लिए व्यक्ति अनेक प्रकार के नशे करने लगता है ,और अंततः शांति य डिसकनेक्ट तो हो नहीं पाता हाँ नशे का आदि ज़रूर हो जाता है.
लेकिन समस्या का समाधान नहीं मिल पा ता, समस्या दिन प्रतिदिन और गंभीर होती जाती है स्वास्थ्य समस्या भी घेरने लगती हैं, व्यक्ति और गहरे डिप्रेशन में पहुँच जाता है साथ में वो ये स्वीकार करने को भी तैयार नहीं होता की उसे मानसिक तनाव (रोग) ने धीरे धीरे जकड लिया है यानि की उसे अपनी समस्या का कोई हल नज़र ही नहीं आता और न ही वो स्वीकार करने को तैयार होता है
कि उसकी समस्या का हल संभव है
और हल बहुत ही आसान है
इस समस्या के मुकाबले के लिए बस एक मात्र रास्ता है और
ऐसे समय में हम सिखाते हैं सिर्फ "ब्रीथिंग टेक्निक"
जिससे कुछ दिन ,कुछ घंटे नहीं
सिर्फ कुछ ही मिनिटो मे फर्क महसूस होने लगता है
जबकि आज के युग में वैज्ञानिक भी मानते की कुछ समय के ध्यान से शांति , मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्यव् जीवन शैली में आमूलचूल परिवर्तन आना शुरू हो जाता है
बशर्ते नियमित अभ्यास करे कम से कम एक से डेढ़ घण्टे तक,लोगो ने इन विधियों को अपनाया है और पूर्ण लाभ पाया है अनेक विद्वानों ने डॉक्टरों की उपस्तिथि में किये गए प्रयोगो ने ध्यान से होने वाले परिवर्तनों को सिद्ध किया है वास्तव में ध्यान का कोई विकल्प नहीं, जवाब नहीं है,
प्रश्न यह है इस तक पहुंचे कैसे ?
असली समस्या यह है,मस्तिष्क में उठने वाले विचारो को आखिर रोके तो रोके कैसे ,
इस स्थिथि को प्राप्त करने की पहली सीढ़ी आखिर है क्या
इस विधि का उपयोग आप कभी भी,
कही भी,किसी भी समय कर सकते है और फर्क तुरंत महसूस कर सकते है,
मानसिक शांति की अनुभूति तुरंत कर सकते है,
और शांत मन से लिए गए निर्णय हमेशा सही होते है
तनाव रहित होते है,
आपके सामान्य व्यव्हार में फर्क आपके आसपास के लोग,मित्र परिवार जन भी महसूस कर सकते है
,इसके बाद आपके चेहरे की चमक तो किसी से छु प नहीं सकती, आपकी खुश मिज़ाज़ी तो किसी से छु प नहीं सकती
***-तो आइये शुरू करते है साँस लेने और छोड़ने की क्रिया को
देखते है ध्यान से-------
बस सामान्य गति से साँस लीजिये और छोड़िये बस ध्यान रखिये आप साँस ले रहे है और साँस छोड़ रहे है,
साँस अंदर जा रही है और बाहर आ रही है
बस अब धीरे से इस साँस को थोड़ा और गहरा लीजिये और थोड़ ज्याद छोड़िये गति सामान्य,,
ऑफिस में काम करते में पढ़ते में ,
किसी से बात करते में सिर्फ ध्यान सांसो पर,जो काम कर रहे है करते रहिये ,
बस अब देखिये फर्क,महसूस कीजिये अपनी मानसिक स्तिथि,
यह है ब्रीथिंग एक्सरसाइज़ की पहली सीढ़ी या यो कहिये तैयारी मात्र --
आगे आपको बताएँगे और साथ ले चलेंगे इस आनंद यात्रा पर बस जुड़े रहिये और जीवन के आनंद को महसूस कीजिये जिस पर आपका अधिकार है,
------जारी -----प्राण-आ-याम -----2 पर
हर दूसरा व्यक्ति इन परेशानियों से त्रस्त है:
आफिस हो घर हो य अन्य कोई स्थान हो तनाव पीछा छोड़ते ही नहीं,
चिंता,फिक्र,तनाव के कारण मन मे शांति नही रहती और जब मन अशांत रहता है
तब उसका मुकाबला करते करते अक्सर व्यक्ति तनाव व डिप्रेशन में आ जाता है,
ज़िंदगी में हरेक की ज़िंदगी में ऐसे मुकाम आ जाते है जहाँ अच्छे से अच्छे ,स्ट्रांग विल पॉवर वाले व्यक्ति भी सब कुछ जानते समझते हुए भी डिप्रेशन,एंगजाइटी,मानसिक तनाव इत्यादि के शिकार हो ही जाते हैं और इनका इलाज़ न तो योग न हीं दवाइयाँ,और ना ही ध्यान से कुछ फर्क पड़ पता ,
ब्रेन दिमाग शान्त ही नहीं होता, विचार रुकते ही नहीं ध्यान क्या और कैसे लगेगा , अनेको विधियां अपनाने के बाद भी मानसिक शांति कुछ पलो के लिए भी मिलना मुश्किल हो जाती है
ऐसे में मात्र कुछ पल डिसकनेक्ट होने के लिए व्यक्ति अनेक प्रकार के नशे करने लगता है ,और अंततः शांति य डिसकनेक्ट तो हो नहीं पाता हाँ नशे का आदि ज़रूर हो जाता है.
लेकिन समस्या का समाधान नहीं मिल पा ता, समस्या दिन प्रतिदिन और गंभीर होती जाती है स्वास्थ्य समस्या भी घेरने लगती हैं, व्यक्ति और गहरे डिप्रेशन में पहुँच जाता है साथ में वो ये स्वीकार करने को भी तैयार नहीं होता की उसे मानसिक तनाव (रोग) ने धीरे धीरे जकड लिया है यानि की उसे अपनी समस्या का कोई हल नज़र ही नहीं आता और न ही वो स्वीकार करने को तैयार होता है
कि उसकी समस्या का हल संभव है
और हल बहुत ही आसान है
इस समस्या के मुकाबले के लिए बस एक मात्र रास्ता है और
ऐसे समय में हम सिखाते हैं सिर्फ "ब्रीथिंग टेक्निक"
जिससे कुछ दिन ,कुछ घंटे नहीं
सिर्फ कुछ ही मिनिटो मे फर्क महसूस होने लगता है
जबकि आज के युग में वैज्ञानिक भी मानते की कुछ समय के ध्यान से शांति , मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्यव् जीवन शैली में आमूलचूल परिवर्तन आना शुरू हो जाता है
बशर्ते नियमित अभ्यास करे कम से कम एक से डेढ़ घण्टे तक,लोगो ने इन विधियों को अपनाया है और पूर्ण लाभ पाया है अनेक विद्वानों ने डॉक्टरों की उपस्तिथि में किये गए प्रयोगो ने ध्यान से होने वाले परिवर्तनों को सिद्ध किया है वास्तव में ध्यान का कोई विकल्प नहीं, जवाब नहीं है,
प्रश्न यह है इस तक पहुंचे कैसे ?
असली समस्या यह है,मस्तिष्क में उठने वाले विचारो को आखिर रोके तो रोके कैसे ,
इस स्थिथि को प्राप्त करने की पहली सीढ़ी आखिर है क्या
इस विधि का उपयोग आप कभी भी,
कही भी,किसी भी समय कर सकते है और फर्क तुरंत महसूस कर सकते है,
मानसिक शांति की अनुभूति तुरंत कर सकते है,
और शांत मन से लिए गए निर्णय हमेशा सही होते है
तनाव रहित होते है,
आपके सामान्य व्यव्हार में फर्क आपके आसपास के लोग,मित्र परिवार जन भी महसूस कर सकते है
,इसके बाद आपके चेहरे की चमक तो किसी से छु प नहीं सकती, आपकी खुश मिज़ाज़ी तो किसी से छु प नहीं सकती
***-तो आइये शुरू करते है साँस लेने और छोड़ने की क्रिया को
देखते है ध्यान से-------
बस सामान्य गति से साँस लीजिये और छोड़िये बस ध्यान रखिये आप साँस ले रहे है और साँस छोड़ रहे है,
साँस अंदर जा रही है और बाहर आ रही है
बस अब धीरे से इस साँस को थोड़ा और गहरा लीजिये और थोड़ ज्याद छोड़िये गति सामान्य,,
ऑफिस में काम करते में पढ़ते में ,
किसी से बात करते में सिर्फ ध्यान सांसो पर,जो काम कर रहे है करते रहिये ,
बस अब देखिये फर्क,महसूस कीजिये अपनी मानसिक स्तिथि,
यह है ब्रीथिंग एक्सरसाइज़ की पहली सीढ़ी या यो कहिये तैयारी मात्र --
आगे आपको बताएँगे और साथ ले चलेंगे इस आनंद यात्रा पर बस जुड़े रहिये और जीवन के आनंद को महसूस कीजिये जिस पर आपका अधिकार है,
------जारी -----प्राण-आ-याम -----2 पर
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