Monday, February 3, 2020

मोटिवशंनल स्पीच:पूर्ण समर्पण य कठिन परिश्रम

मोटिवेशनल स्पीच 

प्रश्न :
क्या कठिन परिश्रम से ही सफलता मिल सकती है?
आज यहां हम बात करेंगे क्या कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है?

नियमित कठिन परिश्रम से प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है साथ ही आउटपुट भी कम हो जाता है,
हार्ड वर्किंग और स्मार्ट वर्किंग में क्या अंतर है,
इस स्टेटमेंट को एक स्टोरी के माध्यम से आपको समझने की कोशिश करेंगे
 दो गरीब लकड़हारे  जिन्हे कई दिनों से कोई काम नहीं मिला था
अचानक उन्हें अचानक कोई जंगल का ठेकेदार मिलता है और उनको कहता है मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ काम है डॉन लकड़हारे बिना कुछ समझे बूझे काम करने को तैयार हो जाते है,
वह ठेकेदार मज़दूरी तय करता है और समय अवधि में काम पुर करने के लिए कुछ और राशि इनाम स्वरुप देने का आश्वासन देता है,
वह उन्हें अलग अलग जगह दो बड़े बड़े पेड़ दिखता है और उन्हें काटने का काम देता है दोनों पेड़ को देख कर  परेशान हो जाते है और सोच ते है इतने बड़े पेड़ को कैसे काटेंगे बहुत म्हणत लगेगी और समय सीमा में काम पूर्ण करना मुश्किल भी नज़र आता है,लेकिन मज़बूरी काम तो करना ही है क्योकि इसके अलावा और कोई चारा नहीं है,
समय अवधि सिर्फ ८ घंटे है काम कठिन है,,
दोनों अलग अलग स्थान पर जा कर अपने अपने काम में भिड़ जाते है
पहला व्यक्ति जाते ही अपने काम में भिड़ जाता है,पसीने पसीने होने लगता है थकने लगता है काम पुर करने की फ़िक्र लगा रहता है यहाँ तक खाना खाने का समय भी न ले कर समय अवधि मे अपना काम पूर्ण करने में लगा रहता है,
वही दूसरा व्यक्ति
जाकर अपने काम को देखता है,सोचता है काम तो कठिन है समय अवधि में पूर्ण होना न मुमकिन है,
वही पेड़ के नीचे बैठ  कर विचार करने लगता है पता नहीं अक़ब में उसका ध्यान लगता है और एक प्रेरणा होती है की इस छोटी सी कुल्हड़ी से इतने समय में काम पूरा करना असंभव लगता है,
प्रेरणा के अनुसार सबसे पहले वो अपनी कुल्हाड़ी की धार लगाने के लिए एक पत्थर पर अपनी कुल्हाड़ी को घिस घिस का रउस्की धार इतनी तेज़ कर लेता कि उस छोटी सी कुल्हाड़ी के एक ही वार से बड़ी से बड़ी टहनी हाल काट सकती है,परन्तु इस साडी प्रक्रिया में उसका आधा समय निकल गया इसी बीच उसके दूसरे  अपना  निबटा लिया था और इसने अभी अपना काम शुरू भी नहीं किया था।
अब जैसे ही पूर्ण ध्यान  काम शुरू किया वैसे ही उसकी तेज़ धार  कुल्हाड़ी के कारण  पूरा पेड़ कुछ ही समय  में कट गया और वो थका भी नहीं,
उसे पूरी मज़दूरी भी मिली इनाम भी मिला और वो थका भी नहीं,
दूसरी और इसका दूसरा साथी थक क्र चूर हो चूका था और उसका पेड़ भी पूरा काट न पाया जिसके कारन उसको आधी मज़दूरी ही मिल सकी वही दूसरे साथी को दो गुनी मज़दूरी मिली,
निष्कर्ष :इस  हमें क्या शिक्षा मिलती है

  • कठिन परिश्रम से सिर्फ आधी मज़दूरी ही मिल सकती है 
  • ध्यान से विचार करके काम करने से कम मेहनत से दुगनी मज़दूरी प्राप्त की जा सकती है, यही फर्क है,
  • कॉन्सियसली स्मार्टली विचार करके प्लानिंग करके अपनी INTUITION को सुनते हुए कार्य करने में अधिक सफलता मिलती है। 
  • सफल लोग वही कार्य अलग तरीके से करते है और असफल लोग सिर्फ बिना सोचे समझे मेहनत  करते है,नतीजा आपके सामने है,
  • हमारी काँशसनेस के कई लेवल होते है प्रथम स्तर पर कठिन परिश्रम सही है
  • जैसे जैसे हमारी कोंसियसन्स के लेवल में प्रगति होती वैसे वैसे काम करने का स्तर व तरीका भी बदल त जाता है,
  • यहां इन सब बातों से हमे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना है और अपना रास्ता चुनना है,
  • आज बस इतना है,

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